यूरोप को आश्वासन, ट्रंप के दृष्टिकोण पर अडिग: रुबियो का भाषण

 म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2026 में मार्को रुबियो का भाषण — पूरा परिप्रेक्ष्य 

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2026 में मार्को रुबियो का यूरोप को संबोधन, ट्रंप की कड़ी विदेश नीति पर कायम


APNewsम्यूनिख, जर्मनी — अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने यूरोप के नेताओं को आश्वस्त करते हुए बताया कि अमेरिका और यूरोप के बीच संबंध अब भी मजबूत हैं, लेकिन सख्त नीतियों के प्रति अमेरिका का रुख नहीं बदला। 

रुबियो ने पिछले साल की तुलना में आज एक अधिक मैत्रीपूर्ण और भरोसा दिलाने वाला लहज़ा अपनाया, ताकि अमेरिका और यूरोप के बीच गिरते भरोसे को फिर से बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका ट्रांस-अटलांटिक गठबंधन को खत्म नहीं करना चाहता, बल्कि उसे नई शर्तों पर फिर से मजबूती के साथ स्थापित करना चाहता है। 

अमेरिका का दृष्टिकोण 

भाषण में रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका 
✔️ “जलवायु परिवर्तन पर कट्टर विचारों” का विरोध करता है 
✔️ “बड़ी मात्रा में आव्रजन” को समाजों के लिए खतरा मानता है 
✔️ अमेरिका और उसके मित्र देशों को अब सीमाओं, पहचान और परंपराओं पर फिर से जोर देना चाहिए 
इन विचारों को उन्होंने ऐसे शब्दों में रखा जो ट्रंप प्रशासन की नीतियों के अनुरूप हैं। 

साझा इतिहास और संबंध 

रुबियो ने कहा कि अमेरिका और यूरोप लंबे समय से ऐतिहासिक रूप से जुड़े हुए हैं — दोनों ने कई युद्धों में साथ में लड़ाई लड़ी है और साझा मूल्यों के कारण हमेशा साथ रहेंगे। 
उन्होंने कहा: 

       "हमारा घर वेस्टर्न हेमिस्फियर में है, लेकिन हम हमेशा यूरोप के बच्चे रहेंगे।” 

यूरोपीय नेताओं की प्रतिक्रिया 

आश्वस्त लेकिन सतर्क 

यूरोपीय संघ की कार्यकारी अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने रुबियो के भाषण को “बहुत reassuring” (आश्वस्त करने वाला) बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका के भीतर कुछ लोग अभी भी कड़े रवैये पर बने हुए हैं।  

यूरोप अपनी शक्ति बढ़ाए 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि यूरोप को पट्ठे पर निर्भर होने की बजाय अपनी रक्षा और राजनीतिक तौर पर अधिक आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता है।  

 “हम अकेले नहीं रह सकते” 

एस्टोनिया जैसे अन्य नेताओं ने भी कहा कि यूरोप को संयुक्त सुरक्षा और साझा जिम्मेदारियों को बढ़ाना चाहिए, क्योंकि अकेले वह वैश्विक चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता 

इसका वैश्विक महत्व 

🔸 यह भाषण ट्रंप प्रशासन की परंपरागत सहयोगी नीतियों से कुछ नरमी दिखाता है, ताकि भविष्य में ट्रांस-एटलांटिक साझेदारी बहाल रहे — खासकर सुरक्षा, व्यापार और वैश्विक मंचों पर।  

🔸 फिर भी, अमेरिका ने नीतियों के आधार सिद्धांत नहीं बदले — विशेषकर आव्रजन, समझौतों में पारस्परिकता, और “राष्ट्रीय प्राथमिकता” के मामलों में। 

निष्कर्ष: 

रुबियो का भाषण अध्यक्ष ट्रंप की विदेश नीति की कठोरता को नरम बोल में दोहराता है — भरोसा जताता है लेकिन मूल नीतियों से समझौता नहीं करता। यूरोपीय नेताओं ने इसे स्वागत योग्य माना, लेकिन अपने लिए वास्तविक रणनीतिक शक्ति और स्वतंत्रता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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