International News: BRICS Summit के बीच दुनिया की नजर भारत पर, ईरान युद्ध और तेल संकट से बढ़ी चिंता
BRICS Summit 2026: ईरान युद्ध, तेल संकट और वैश्विक तनाव के बीच भारत में हो रही BRICS बैठक पर पूरी दुनिया की नजर।नई दिल्ली। दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत में आज से BRICS Leaders’ Summit शुरू हो रहा है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर है। अमेरिका-ईरान संघर्ष, तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को लेकर बने तनाव के बीच BRICS देशों के सामने एकजुट रुख बनाने की चुनौती है।
इस सम्मेलन में BRICS के प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी प्रस्तावित है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत कई प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। वहीं, BRICS के भीतर ही मध्य पूर्व के संकट को लेकर अलग-अलग हित होने के कारण संयुक्त रुख बनाना आसान नहीं माना जा रहा।
ईरान युद्ध का BRICS पर असर
BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इससे दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई बढ़ने की चिंता भी गहरा गई है।
विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि BRICS देश मध्य पूर्व के संकट को लेकर किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं और क्या सम्मेलन के दौरान सदस्य देश किसी साझा रुख पर पहुंच पाएंगे।
लाल सागर में भी बढ़ा तनाव
इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर के प्रवेश द्वार के पास स्थित Mayun Island पर कब्जा किए जाने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है। यह क्षेत्र वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद सऊदी अरब ने यमन के मोखा एयरपोर्ट पर हवाई हमले किए।
लाल सागर और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल और माल ढुलाई पर असर डाल सकता है। ऐसे में BRICS Summit का महत्व और बढ़ गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है सम्मेलन?
भारत के लिए BRICS Summit कूटनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर भारत अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर BRICS में चीन, रूस और ईरान जैसे देश भी महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं।
ऐसे समय में नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन भारत को वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक भूमिका मजबूत करने का अवसर देता है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, व्यापार और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों के अलावा मध्य पूर्व संकट पर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
तेल की कीमतों पर दुनिया की नजर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है और कुछ बाजारों में यह करीब 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची। यदि होर्मुज और लाल सागर के रास्तों पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो इसका असर परिवहन, महंगाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजर नई दिल्ली में होने वाले BRICS Summit पर है। आने वाले दो दिनों में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों से यह स्पष्ट होगा कि BRICS देश मौजूदा युद्ध और वैश्विक आर्थिक संकट को लेकर किस तरह का साझा संदेश देते हैं।

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