BRICS Summit 2026: मध्य पूर्व संकट पर BRICS की चिंता, अधिकतम संयम की अपील

International News: BRICS ने मध्य पूर्व संकट पर जताई गंभीर चिंता, अधिकतम संयम की अपील

BRICS देशों की बैठक और मध्य पूर्व संकट को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर।

नई दिल्ली। भारत की मेजबानी में सितंबर 2026 में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हिंसा को लेकर गंभीर चिंता जताई। New Delhi Declaration में संघर्ष से जुड़े पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसी कार्रवाइयों से बचने की अपील की गई, जिनसे स्थिति और बिगड़ सकती है।

BRICS की संयुक्त घोषणा ऐसे समय सामने आई जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के कारण मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति गंभीर बनी हुई थी। संगठन ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद, परामर्श और कूटनीति को महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

BRICS ने मध्य पूर्व में अधिकतम संयम की अपील की

Reuters के अनुसार, New Delhi Declaration में BRICS देशों ने मध्य पूर्व में लगातार बढ़ रहे तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की। घोषणा में सभी संबंधित पक्षों से maximum restraint बरतने और तनाव को और बढ़ाने वाली गतिविधियों से बचने का आह्वान किया गया।

BRICS ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए बातचीत, परामर्श और कूटनीति के जरिए शांतिपूर्ण रास्ता अपनाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

भारत में हुआ BRICS Summit 2026

2026 का BRICS नेताओं का शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हुआ। भारत ने 2026 में BRICS की अध्यक्षता की। सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

मध्य पूर्व की स्थिति के अलावा सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

शी जिनपिंग ने BRICS की भूमिका मजबूत करने पर दिया जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में BRICS की आर्थिक और तकनीकी भूमिका को मजबूत करने की दिशा में कई प्रस्तावों पर जोर दिया। Reuters के अनुसार उन्होंने व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वित्तीय सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में विस्तारित BRICS देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की बात कही।

BRICS में नए सदस्य देशों के शामिल होने के बाद संगठन की भूमिका वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग के मंच के रूप में और व्यापक हुई है।

मध्य पूर्व संकट का तेल और समुद्री व्यापार पर असर

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इस क्षेत्र की स्थिति का प्रभाव तेल, गैस, समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। खासकर Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बनी हुई है।

भारत सहित कई देशों के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग और ऊर्जा आपूर्ति महत्वपूर्ण हैं। BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के साथ बातचीत में भी समुद्री आवागमन, वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया था।

BRICS की संयुक्त घोषणा क्यों महत्वपूर्ण है?

BRICS में ऐसे देश भी शामिल हैं जिनके मध्य पूर्व संकट को लेकर अलग-अलग हित और दृष्टिकोण हैं। इसके बावजूद सदस्य देशों द्वारा संयुक्त घोषणा जारी करना इस समूह के भीतर संवाद और सहमति बनाने की प्रक्रिया को दर्शाता है।

घोषणा में किसी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करने के बजाय तनाव कम करने, संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

BRICS Summit 2026 के प्रमुख बिंदु

  • मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
  • संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई।
  • तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने पर जोर दिया गया।
  • संवाद, परामर्श और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की बात कही गई।
  • वैश्विक व्यापार और एकतरफा व्यापारिक उपायों को लेकर भी चिंताएं सामने आईं।
  • BRICS के आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा हुई।

स्रोत: Reuters और उपलब्ध आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय जानकारी।

नोट: यह रिपोर्ट सितंबर 2026 में नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन और New Delhi Declaration के आधार पर तैयार की गई है। मध्य पूर्व संकट से जुड़े अलग-अलग देशों के रुख को उनके आधिकारिक बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

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