MP News: जबलपुर ट्रैफिक समस्या पर हाईकोर्ट सख्त, विशेषज्ञ समिति के 5 नाम प्रस्तावित

MP News: जबलपुर की ट्रैफिक समस्या पर हाईकोर्ट सख्त, विशेषज्ञ समिति के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी

जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने को लेकर हाईकोर्ट में विशेषज्ञ समिति के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शहर में लगातार सामने आ रही ट्रैफिक जाम, खराब ट्रैफिक सिग्नल, अतिक्रमण और पार्किंग जैसी समस्याओं के समाधान के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है।

यह मामला जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट के सामने पहुंचा है। सितंबर 2026 में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि प्रशासन की ओर से कुछ कदम उठाए जाने के बावजूद जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में अभी सुधार की जरूरत है। सरकार ने पहले ट्रैफिक मैनेजमेंट सेल गठित किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी थी।

जबलपुर ट्रैफिक समस्या पर हाईकोर्ट का रुख

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान शहर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याओं पर चर्चा हुई। इनमें ट्रैफिक जाम, काम नहीं कर रहे या खराब ट्रैफिक सिग्नल, सड़क किनारे अतिक्रमण और पार्किंग से जुड़ी परेशानियां प्रमुख हैं।

कोर्ट ने यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने पर जोर दिया है, ताकि शहर की मौजूदा व्यवस्था का तकनीकी और व्यावहारिक अध्ययन कर प्रभावी समाधान सुझाए जा सकें।

सरकार ने विशेषज्ञ समिति के लिए 5 नाम सुझाए

29 सितंबर 2026 की सुनवाई से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार ने जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए हाईकोर्ट के सामने पांच विशेषज्ञों के नाम और उनके बायोडाटा प्रस्तावित किए। इन नामों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी था।

रिपोर्टों के अनुसार, हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर मध्य प्रदेश के दूसरे शहरों में भी यातायात सुधार के लिए ऐसी विशेषज्ञ समितियां गठित की जा सकती हैं।

समिति का उद्देश्य क्या होगा?

प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति का उद्देश्य जबलपुर की यातायात व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का अध्ययन करना और सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव देना होगा। इसमें ट्रैफिक सिग्नल, प्रमुख चौराहों, सड़क व्यवस्था, अतिक्रमण, पार्किंग और यातायात प्रबंधन जैसे विषयों पर ध्यान दिया जा सकता है।

हाईकोर्ट से जुड़ी रिपोर्टों में यातायात सुधार के लिए ट्रैफिक इंजीनियरिंग, ट्रैफिक एजुकेशन और ट्रैफिक एनफोर्समेंट जैसे पहलुओं पर भी जोर दिए जाने का उल्लेख है।

पहले से बनाया गया है ट्रैफिक मैनेजमेंट सेल

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि जबलपुर में ट्रैफिक मैनेजमेंट सेल बनाया गया है और नगर निगम को इसकी नोडल एजेंसी बनाया गया है। अलग-अलग अधिकारियों को चौराहों, सड़कों, अतिक्रमण और पार्किंग से जुड़े विषयों की जिम्मेदारियां दी गई हैं।

शहरवासियों को ट्रैफिक जाम से राहत की उम्मीद

जबलपुर में बढ़ते यातायात दबाव के बीच विशेषज्ञ समिति की प्रक्रिया को शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, वास्तविक बदलाव समिति की अंतिम संरचना, उसकी रिपोर्ट और प्रशासन द्वारा लागू किए जाने वाले सुझावों पर निर्भर करेगा।

यदि विशेषज्ञ अध्ययन के आधार पर प्रमुख चौराहों, सिग्नल व्यवस्था, पार्किंग और अतिक्रमण से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाता है, तो इससे शहर में यातायात संचालन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या होगा?

सरकार की ओर से विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए जाने के बाद अब हाईकोर्ट की प्रक्रिया के अनुसार समिति के गठन और उसके कार्यक्षेत्र पर आगे निर्णय होना है। 29 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित थी।

स्रोत: उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की कार्यवाही से संबंधित प्रकाशित जानकारी के आधार पर।

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