राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ आरोप: SIR विवाद में नया मोड़, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन तेज
नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार तेज हो रहा है। सितंबर से शुरू हुआ यह विवाद अब चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव, Form-6 और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।
राहुल गांधी और कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से जवाब और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े फैसले आयोग के तीनों सदस्यों की सहमति से लिए गए हैं और अलग-अलग स्तर पर सामने आए सवाल निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं। BJP ने भी राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। :contentReference[oaicite:1]{index=1}
राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ आरोप क्या हैं?
राहुल गांधी लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और सत्यापन की प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। पार्टी SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक रूप से जवाब मांग रही है।
इन आरोपों को चुनाव आयोग और BJP स्वीकार नहीं करते हैं। इसलिए ‘वोट चोरी’ को किसी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि राहुल गांधी और कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में देखना जरूरी है।
चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की आपत्तियों से बढ़ा विवाद
सितंबर 2026 में The Indian Express की एक रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर विवाद और बढ़ गया। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के पंजीकरण, Form-6 और चुनावी डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल थे। :contentReference[oaicite:2]{index=2}
रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अलग-अलग सदस्यों की राय या सुझाव को संस्थागत असहमति नहीं माना जाना चाहिए। आयोग के अनुसार SIR समेत उसके फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। :contentReference[oaicite:3]{index=3}
Form-6 को लेकर भी उठे सवाल
विवाद में Form-6 भी महत्वपूर्ण मुद्दा बना। यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। रिपोर्टों में Form-6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए। चुनाव आयोग ने बाद में स्पष्ट किया कि मूल Form-6 में बदलाव नहीं किया गया है और SIR से संबंधित प्रावधान अलग प्रक्रिया के रूप में जोड़े गए थे। :contentReference[oaicite:4]{index=4}
सुप्रीम कोर्ट ने भी मामले पर लिया संज्ञान
SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई है। 5 अक्टूबर 2026 को अदालत ने केंद्र और चुनाव आयोग से जवाब मांगा। हालांकि अदालत ने इस स्तर पर ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने संबंधी अंतरिम मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता और यदि कोई निर्णय कानून के विपरीत पाया जाता है तो न्यायिक स्तर पर उसकी समीक्षा की जा सकती है। :contentReference[oaicite:5]{index=5}
Form-6 से संबंधित सुनवाई में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित रूप से बदले गए Form-6 को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी प्राप्त होने की बात नहीं कही जा सकती। इस मुद्दे ने SIR की प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस को और महत्वपूर्ण बना दिया है। :contentReference[oaicite:6]{index=6}
4 अक्टूबर को उद्धव और राज ठाकरे का मुंबई में संयुक्त प्रदर्शन
SIR को लेकर विपक्ष का विरोध सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे लंबे समय बाद एक संयुक्त मंच पर दिखाई दिए। दोनों नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में SIR को रद्द करने की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला। राज ठाकरे ने EVM की जगह बैलेट पेपर से मतदान की मांग भी उठाई। :contentReference[oaicite:7]{index=7}
महाराष्ट्र में SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम प्रभावित होने का मुद्दा विपक्ष ने उठाया है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आए आंकड़ों को अंतिम रूप से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए और दावे-आपत्तियों के लिए प्रक्रिया उपलब्ध है। :contentReference[oaicite:8]{index=8}
6 अक्टूबर को दिल्ली में विपक्ष का चुनाव आयोग की ओर मार्च
विवाद ने 6 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में नया राजनीतिक मोड़ लिया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और INDIA ब्लॉक के कई सांसद चुनाव आयोग की ओर मार्च करने पहुंचे। पुलिस ने मार्च को आगे बढ़ने से रोका, जिसके बाद विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर जवाब की मांग की। :contentReference[oaicite:9]{index=9}
7 अक्टूबर को भी जारी रहा विरोध
7 अक्टूबर 2026 को भी दिल्ली में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। राहुल गांधी और कई विपक्षी सांसदों को प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। विपक्षी दलों ने SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा तथा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। चुनाव आयोग और BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। :contentReference[oaicite:10]{index=10}
BJP ने राहुल गांधी के आरोपों को किया खारिज
राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों पर BJP लगातार सवाल उठा रही है। BJP का कहना है कि चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोप राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं और कांग्रेस को अपनी चुनावी हार की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए। BJP ने SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को भी राजनीति से प्रेरित बताया है। :contentReference[oaicite:11]{index=11}
इस तरह मौजूदा विवाद में तीन प्रमुख पक्ष सामने हैं—राहुल गांधी और कांग्रेस का चुनावी प्रक्रिया पर सवाल, चुनाव आयोग का अपने फैसलों और प्रक्रिया का बचाव तथा BJP का कांग्रेस के आरोपों को खारिज करना।
SIR विवाद में अब आगे क्या?
फिलहाल ‘वोट चोरी’ कोई न्यायिक रूप से स्थापित निष्कर्ष नहीं है, बल्कि राहुल गांधी और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों का हिस्सा है। दूसरी ओर चुनाव आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और अपने फैसलों को संवैधानिक तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत लिया गया बताता है।
अब इस विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा न्यायिक प्रक्रिया बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं, चुनाव आयोग के जवाब और मतदाता सूची से जुड़े दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया से आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि विवादित फैसलों और प्रक्रियाओं पर अदालत तथा संबंधित संवैधानिक संस्थाओं का रुख क्या रहता है।
इस पूरे मामले में आरोप, राजनीतिक बयान, चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष और अदालत की कार्यवाही को अलग-अलग देखना जरूरी है। जब तक किसी सक्षम न्यायिक या संवैधानिक प्रक्रिया से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आता, किसी भी पक्ष के दावे को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
Source Note: यह रिपोर्ट सितंबर–अक्टूबर 2026 में प्रकाशित सार्वजनिक रिपोर्टों, चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण, सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्यवाही और विभिन्न राजनीतिक दलों के सार्वजनिक बयानों के आधार पर अपडेट की गई है। ‘वोट चोरी’ और SIR से जुड़े राजनीतिक आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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