UN में शहबाज शरीफ का भाषण: कश्मीर और सिंधु जल मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान में फिर तकरार
संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ।
न्यूयॉर्क: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने कश्मीर, सिंधु जल, भारत-पाकिस्तान संबंध, फिलिस्तीन, पश्चिम एशिया और वैश्विक सुरक्षा समेत कई मुद्दे उठाए। भाषण के दौरान भारत-पाकिस्तान विवाद से जुड़े मुद्दे एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा के केंद्र में रहे।
शहबाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाया
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाते हुए पाकिस्तान की लंबे समय से चली आ रही स्थिति दोहराई। उन्होंने कश्मीर विवाद के लिए एक “न्यायसंगत और उचित समाधान” की आवश्यकता बताई और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का हवाला दिया।
भारत इस मुद्दे पर पाकिस्तान से अलग रुख रखता है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। भारत ने UN में अपने जवाब के दौरान भी पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज किया।
सिंधु जल को लेकर शहबाज शरीफ की कड़ी चेतावनी
शहबाज शरीफ के भाषण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सिंधु नदी के पानी और सिंधु जल संधि से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को पाकिस्तान “युद्ध की कार्रवाई” के तौर पर देखेगा।
पाकिस्तान का कहना है कि भारत की ओर से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय कानूनी आधार से रहित है। दूसरी ओर, भारत ने इस विषय पर अपनी कार्रवाई को सुरक्षा परिस्थितियों और सीमा-पार आतंकवाद से जोड़ा है। इस मुद्दे पर दोनों देशों की स्थिति अलग-अलग है।
भारत ने Right of Reply में दिया जवाब
शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में Right of Reply के तहत जवाब दिया। भारत की ओर से प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कश्मीर और भारत से जुड़े आरोपों को खारिज किया तथा सीमा-पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया।
भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान की राजनीति, आतंकवाद और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए। भारत ने कहा कि आतंकवाद से जुड़ी चुनौतियों के बीच वह अपनी सुरक्षा और आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा। ये बातें भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थीं।
2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव का भी जिक्र
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप ने उस समय तनाव को कम करने में मदद की। यह शहबाज शरीफ का दावा था, जिसे उनके भाषण के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भारत की ओर से इस घटनाक्रम को अलग नजरिए से प्रस्तुत किया गया। UN में भारत के जवाब में पाकिस्तान पर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए और कहा गया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने का अधिकार रखता है।
शहबाज शरीफ ने ईरान-अमेरिका संवाद और क्षेत्रीय शांति का भी मुद्दा उठाया
शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदब को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग बताया और इन्हें टकराव के केंद्र में नहीं बदलने की अपील की।
उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच संवाद तथा क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका का भी उल्लेख किया। पाकिस्तान के अनुसार, बातचीत और कूटनीति के जरिए क्षेत्रीय शांति को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
फिलिस्तीन और वैश्विक मुद्दों पर भी बोले
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी अपना रुख रखा। उन्होंने स्वतंत्र और संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य के गठन की वकालत की। इसके अलावा उन्होंने जलवायु परिवर्तन, विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया।
भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद फिर सामने आए
UNGA 2026 में शहबाज शरीफ के भाषण और भारत के जवाब से साफ हुआ कि कश्मीर, सिंधु जल और आतंकवाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में अभी भी प्रमुख विवादित मुद्दे बने हुए हैं। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने-अपने पक्ष रखे और एक-दूसरे के दावों को स्वीकार नहीं किया।
ऐसे मामलों में किसी एक पक्ष के बयान को अंतिम तथ्य मानने के बजाय दोनों देशों के आधिकारिक रुख और उपलब्ध दस्तावेजों को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है। संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण राजनीतिक और कूटनीतिक पक्ष रखते हैं; उनके सभी दावों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
निष्कर्ष
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में कश्मीर और सिंधु जल समेत कई मुद्दों पर पाकिस्तान का पक्ष रखा। पानी को लेकर उनकी कड़ी चेतावनी के बाद भारत ने Right of Reply में जवाब दिया। इससे एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक मतभेद अंतरराष्ट्रीय मंच पर सामने आए।
Source Note: यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र से संबंधित उपलब्ध रिकॉर्ड और भारत-पाकिस्तान के आधिकारिक/विश्वसनीय समाचार स्रोतों में प्रकाशित बयानों के आधार पर अपडेट की गई है।
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