बांदकपुर में पेट्रोल पंप की लीज पर ट्रस्ट का फैसला, मंत्री के पत्र से बढ़ी हलचल; कॉरिडोर और जमीन को लेकर क्या है पूरा मामला?
बांदकपुर में पेट्रोल पंप की लीज को लेकर मंदिर ट्रस्ट के नोटिस और मंत्री के पत्र की प्रतियां।
दमोह/बांदकपुर। प्रसिद्ध श्री जागेश्वरनाथ धाम बांदकपुर में मंदिर ट्रस्ट की भूमि पर संचालित पेट्रोल पंप की लीज को लेकर ट्रस्ट के फैसले और पर्यटन एवं धार्मिक न्यास मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के पत्र से मामला चर्चा में है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब बांदकपुर में करीब 100 करोड़ रुपये की कॉरिडोर परियोजना के तहत विकास कार्य चल रहे हैं और परियोजना क्षेत्र में भूमि उपलब्धता तथा अतिक्रमण जैसे मुद्दे भी सामने आए हैं।
मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पक्ष के अनुसार 27 सितंबर 2026 को हुई ट्रस्ट कमेटी की बैठक में पेट्रोल पंप की लीज आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट का कहना है कि लीज अवधि पूरी होने के बाद भूमि वापस लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विकास कार्य किए जाने की योजना है।
पेट्रोल पंप की लीज को लेकर ट्रस्ट ने क्या फैसला लिया?
मंदिर ट्रस्ट कमेटी के सचिव पंकज हर्ष श्रीवास्तव के अनुसार पेट्रोल पंप की लीज 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई और ट्रस्ट ने इसे आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। ट्रस्ट के अनुसार संबंधित भूमि को वापस लेकर श्रद्धालुओं और यात्रियों की सुविधा के लिए विकास कार्य कराने की योजना है।
ट्रस्ट से सामने आई जानकारी में खाली होने वाली भूमि पर धर्मशाला, सुलभ शौचालय, पार्किंग और अन्य जनसुविधाओं जैसे कार्यों की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन सुविधाओं में से अंतिम रूप से कौन-सा निर्माण होगा, इसकी आधिकारिक परियोजना या स्वीकृत नक्शे की पुष्टि जरूरी होगी।
27 सितंबर की बैठक में श्रद्धालुओं ने क्या मांग रखी?
ट्रस्ट की बैठक के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और शिवभक्तों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार 50 से अधिक श्रद्धालुओं ने आवेदन देकर पेट्रोल पंप की लीज आगे नहीं बढ़ाने और मंदिर की भूमि का उपयोग श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए करने की मांग रखी थी।
इसके बाद ट्रस्ट कमेटी की ओर से लीज आगे नहीं बढ़ाने के निर्णय की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई।
मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी के पत्र में क्या कहा गया?
इसी बीच मध्य प्रदेश के संस्कृति, पर्यटन एवं धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का 22 सितंबर 2026 का एक पत्र सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार यह पत्र पर्यटन विभाग के महाप्रबंधक को भेजा गया था।
पत्र में बांदकपुर में संचालित पेट्रोल पंप को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर निर्माण की सीमा निर्धारित करने का आग्रह किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने पेट्रोल पंप को क्षेत्र के नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुविधा बताते हुए उसके संचालन वाले हिस्से को छोड़कर शेष क्षेत्र में कॉरिडोर निर्माण कराने का अनुरोध किया।
महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्री का पत्र और मंदिर ट्रस्ट का लीज संबंधी निर्णय दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं। इसलिए पत्र को ट्रस्ट के निर्णय को बदलने वाला अंतिम आदेश मानना उचित नहीं होगा, जब तक संबंधित विभाग या सक्षम प्राधिकारी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक आदेश सामने न आए।
बांदकपुर कॉरिडोर की जमीन को लेकर पहले से चुनौती
बांदकपुर में प्रस्तावित कॉरिडोर परियोजना करीब 100 करोड़ रुपये की है और इसे कई चरणों में विकसित किया जाना है। परियोजना से जुड़े विकास कार्यों में भूमि उपलब्धता और अतिक्रमण का मुद्दा पहले भी सामने आ चुका है। हालिया रिपोर्टों में कॉरिडोर क्षेत्र में भूमि चिन्हांकन और कुछ कब्जाधारियों तथा किरायेदारों को नोटिस दिए जाने का उल्लेख किया गया है।
इससे स्पष्ट है कि पेट्रोल पंप की भूमि का मामला केवल लीज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे बांदकपुर के व्यापक विकास और कॉरिडोर के लिए भूमि व्यवस्था के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
ट्रस्ट की योजना: श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं
ट्रस्ट सचिव के अनुसार लीज समाप्त होने के बाद भूमि को ट्रस्ट के उपयोग में लेकर श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं विकसित करने की योजना है। इसके लिए ट्रस्ट अपने स्तर पर और दानदाताओं की सहायता से विकास कार्य कराने की बात कह रहा है।
हालांकि, प्रस्तावित धर्मशाला, पार्किंग, शौचालय या अन्य सुविधाओं के अंतिम स्वरूप की पुष्टि ट्रस्ट के लिखित आदेश, स्वीकृत योजना या प्रशासनिक दस्तावेज से होना बाकी है।
अतिक्रमण और भूमि विवाद भी बना मुद्दा
बांदकपुर कॉरिडोर क्षेत्र में अतिक्रमण और भूमि अधिकार से जुड़े मामले भी पहले सामने आ चुके हैं। जून 2026 की रिपोर्टों में परियोजना के लिए आवश्यक भूमि, अतिक्रमण और पट्टा विवाद को चुनौती के रूप में बताया गया था। संबंधित रिपोर्ट के अनुसार मंदिर ट्रस्ट की ओर से कुछ कब्जाधारियों और किरायेदारों को भूमि खाली करने के नोटिस दिए गए थे।
इन मामलों में किस भूमि पर किसका अधिकार है और प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई हुई है, यह संबंधित राजस्व रिकॉर्ड तथा सक्षम प्रशासनिक आदेशों से ही अंतिम रूप से स्पष्ट होगा।
जलभराव की समस्या के लिए अलग योजना
बांदकपुर धाम में बारिश के दौरान होने वाले जलभराव को लेकर भी विकास योजना पर चर्चा हुई है। हालिया रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट की ओर से जलभराव की समस्या के समाधान के लिए करीब 20 करोड़ रुपये के अलग प्लान की जानकारी दिए जाने का उल्लेख है।
इस योजना की स्वीकृति, वित्तीय मंजूरी और निर्माण की वर्तमान स्थिति की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
कॉरिडोर परियोजना कितनी बड़ी है?
बांदकपुर के श्री जागेश्वरनाथ धाम के विकास के लिए करीब 100 करोड़ रुपये की कॉरिडोर परियोजना प्रस्तावित है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार परियोजना को कई चरणों में विकसित किया जाना है और इसमें श्रद्धालुओं की सुविधा, सौंदर्यीकरण, यातायात व्यवस्था तथा अन्य विकास कार्य शामिल हैं।
परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण विषय है। इसी वजह से मंदिर ट्रस्ट की भूमि, अतिक्रमण और मौजूदा व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर उठने वाले निर्णयों का असर भविष्य के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या है?
30 सितंबर 2026 को लीज अवधि पूरी होने के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि पेट्रोल पंप की भूमि को लेकर ट्रस्ट आगे क्या लिखित कार्रवाई करता है और संबंधित प्रशासनिक एवं नियामकीय विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
सिर्फ लीज अवधि समाप्त होने से पेट्रोल पंप के संचालन से जुड़े सभी अन्य लाइसेंस और वैधानिक अनुमतियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं, ऐसा मानना सही नहीं होगा। भूमि अधिकार, पेट्रोलियम संबंधी अनुमति और अन्य नियामकीय प्रक्रियाओं की स्थिति संबंधित दस्तावेजों और सक्षम विभागों के आदेश से ही स्पष्ट होगी।
बांदकपुर मामले की टाइमलाइन
22 सितंबर 2026: मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का पेट्रोल पंप को ध्यान में रखते हुए कॉरिडोर क्षेत्र निर्धारित करने संबंधी पत्र सामने आया।
27 सितंबर 2026: मंदिर ट्रस्ट कमेटी की बैठक हुई। ट्रस्ट से जुड़े पक्ष के अनुसार पेट्रोल पंप की लीज आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
30 सितंबर 2026: ट्रस्ट सचिव के अनुसार पेट्रोल पंप की लीज अवधि समाप्त हुई।
1 अक्टूबर 2026 के बाद: भूमि के उपयोग, पेट्रोल पंप के संचालन और ट्रस्ट के अगले कदम को लेकर स्थिति संबंधित आधिकारिक आदेशों और कार्रवाई पर निर्भर है।
मंत्री के पत्र और ट्रस्ट के फैसले में क्या अंतर है?
मामले को समझने के लिए दोनों बातों को अलग रखना जरूरी है। मंत्री का पत्र कॉरिडोर की सीमा निर्धारित करने और पेट्रोल पंप की उपयोगिता को ध्यान में रखने का अनुरोध बताता है, जबकि ट्रस्ट का फैसला उसकी भूमि की लीज आगे नहीं बढ़ाने से संबंधित है।
आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि ट्रस्ट, जिला प्रशासन, पर्यटन विभाग और पेट्रोलियम संबंधी सक्षम प्राधिकारी इस मामले में क्या आधिकारिक कार्रवाई करते हैं।
ट्रस्ट सचिव का बयान
“कमेटी ने एकमत निर्णय लिया है कि पेट्रोल पंप की लीज 30 सितंबर को समाप्त हो रही है और इसे आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। कमेटी पंप की खाली जमीन पर स्वयं के व्यय और दानदाताओं की मदद से आगे विकास कार्य करेगी।”
— पंकज हर्ष श्रीवास्तव, सचिव, मंदिर ट्रस्ट कमेटी
नोट: इस खबर में ट्रस्ट के निर्णय, मंत्री के पत्र और कॉरिडोर परियोजना से संबंधित उपलब्ध रिपोर्टों को अलग-अलग रखा गया है। पेट्रोल पंप के वर्तमान संचालन, भूमि खाली कराने अथवा किसी प्रशासनिक कार्रवाई की अंतिम स्थिति संबंधित विभागों के आधिकारिक आदेश से ही स्पष्ट होगी।
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