छतरपुर में तालाब विवाद: रैकवार समाज ने SP से मांगी सुरक्षा

छतरपुर में तालाब विवाद: शिवनारायण रैकवार ने लगाए धमकी, मारपीट और अवैध वसूली के आरोप, SP से मांगी सुरक्षा

छतरपुर | 24 अक्टूबर 2026

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के ग्राम नंदगांवकलां में मछली पालन के तालाब को लेकर विवाद सामने आया है। मछुआ सहकारी समिति के सदस्य शिवनारायण रैकवार ने कुछ लोगों पर तालाब खाली करने के लिए धमकाने, मारपीट करने, जालियां तोड़ने, मछलियां ले जाने और पैसों की मांग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले को लेकर समिति के लगभग 30 से 40 सदस्य छतरपुर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों से सुरक्षा तथा निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।

छतरपुर के नंदगांवकलां में तालाब विवाद को लेकर SP कार्यालय पहुंचे मछुआ सहकारी समिति के सदस्यPhoto Caption: छतरपुर में तालाब पर मछली पालन को लेकर विवाद के बीच मछुआ सहकारी समिति के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग की।

शिवनारायण रैकवार का कहना है कि उनके पास संबंधित तालाब में मछली पालन के लिए पट्टा है। इसके बावजूद उन्हें और समिति से जुड़े अन्य लोगों को कथित रूप से परेशान किया जा रहा है। उनका आरोप है कि तालाब खाली करने के लिए दबाव बनाया जाता है और विरोध करने पर मारपीट तथा धमकियों का सामना करना पड़ता है।

पट्टे वाले तालाब को खाली कराने का दबाव डालने का आरोप

शिकायतकर्ता शिवनारायण रैकवार ग्राम नंदगांवकलां के निवासी और मछुआ सहकारी समिति के सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि समिति के सदस्य तालाब में मछली पालन करके अपनी आजीविका चलाते हैं। उनके अनुसार, तालाब का पट्टा होने के बावजूद गांव और आसपास के कुछ लोग उन्हें वहां मछली पालन नहीं करने देना चाहते।

शिवनारायण का आरोप है कि संबंधित लोग तालाब खाली करने के लिए दबाव बनाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब समिति के सदस्य इसका विरोध करते हैं, तो उनके साथ मारपीट की जाती है और उन्हें धमकाया जाता है।

जालियां तोड़ने और मछलियां ले जाने की शिकायत

शिवनारायण रैकवार ने आरोप लगाया कि तालाब में लगाई गई जालियों को तोड़ा जाता है और वहां मौजूद मछलियां निकालकर ले जाई जाती हैं। उनका कहना है कि इस तरह की घटनाओं से मछली पालन के काम में नुकसान होता है और समिति के सदस्यों की आजीविका प्रभावित होती है।

उन्होंने कुछ लोगों पर अवैध रूप से पैसे मांगने और मांग पूरी नहीं होने पर धमकियां देने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों के संबंध में नुकसान की मात्रा, कथित घटनाओं की तारीखों और किसी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इनकी पुष्टि जांच और संबंधित साक्ष्यों के आधार पर होनी बाकी है।

जीतेंद्र यादव का नाम लेकर लगाए आरोप

रिपोर्टर से बातचीत के दौरान शिवनारायण रैकवार ने आरोपियों के संबंध में यादव समाज के कुछ लोगों का उल्लेख किया और मुख्य रूप से जीतेंद्र यादव का नाम लिया। यह नाम शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के संदर्भ में सामने आया है। संबंधित व्यक्ति का पक्ष और आरोपों पर उसका जवाब उपलब्ध नहीं है।

इसलिए आरोपों को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

शिवनारायण रैकवार का आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर संबंधित थाने जाते हैं, तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उनसे ही सवाल-जवाब किए जाते हैं। उनका कहना है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित लोगों को स्थानीय और राजनीतिक स्तर पर संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, राजनीतिक संरक्षण के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष भी सामने आना बाकी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित थाना ओरछा है। मामले में पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है, कोई शिकायत या प्राथमिकी दर्ज हुई है या नहीं और प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं—इन सवालों पर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध होने पर स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

30 से 40 समिति सदस्य पहुंचे SP कार्यालय

तालाब विवाद को लेकर मछुआ सहकारी समिति के लगभग 30 से 40 सदस्य छतरपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे। शिवनारायण रैकवार के मुताबिक, समिति के सदस्य किसी प्रकार का विवाद नहीं चाहते, बल्कि वे चाहते हैं कि उन्हें कानून के अनुसार अपने अधिकारों के तहत मछली पालन करने दिया जाए।

समिति के सदस्यों ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, शिकायत में लगाए गए आरोपों पर उचित कार्रवाई करने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें सुरक्षा मिलती है, तो वे बिना किसी डर के अपना काम कर सकेंगे और परिवार की आजीविका चला सकेंगे।

अब पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल तालाब के पट्टे की वैधता, कथित धमकियों, जालियां तोड़े जाने, मछलियां ले जाने और पैसों की मांग के आरोपों की जांच का है। यदि शिकायतकर्ता के पास पट्टे के दस्तावेज और घटनाओं से जुड़े साक्ष्य हैं, तो उनकी जांच के आधार पर विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

पुलिस प्रशासन के लिए दोनों पक्षों की बात सुनकर निष्पक्ष जांच करना और साक्ष्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करना महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, शिकायतकर्ताओं को अपनी बात रखने और कानून के अनुसार सुरक्षा मांगने का अवसर मिलना चाहिए।

फिलहाल शिवनारायण रैकवार और समिति के सदस्यों की मांग है कि उन्हें तालाब में मछली पालन करने के अधिकार और सुरक्षा को लेकर न्याय मिले। अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दी गई शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।

नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित व्यक्ति और पुलिस प्रशासन का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होना बाकी है।

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