बैंक ऑफ महाराष्ट्र मोरखा शाखा में 1.14 करोड़ की कथित धोखाधड़ी, 3 पर कार्रवाई

बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में 1.14 करोड़ की कथित वित्तीय गड़बड़ी, सहायक प्रबंधक समेत तीन के खिलाफ कार्रवाई

बैतूल, 24 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा से जुड़ा कथित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलकर नेट बैंकिंग के माध्यम से लेनदेन किए गए और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के आधार पर फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाने का प्रयास किया गया। मामले में करीब 1.14 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की जांच की जा रही है। बोरदेही पुलिस ने 24 अक्टूबर को बैंक के सहायक प्रबंधक सहित दो वयस्क आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। एक विधि विरुद्ध बालक के संबंध में भी किशोर न्याय कानून के तहत कार्रवाई की गई है।

बैतूल जिले के मोरखा बैंक ऑफ महाराष्ट्र की कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में बोरदेही पुलिस की कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपी।
Caption: बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा से जुड़े कथित वित्तीय घोटाले में बोरदेही पुलिस की कार्रवाई। फोटो: Police Social Midea Account.

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में छह अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं। जांच के दौरान छह मोबाइल फोन, सोना-चांदी और एक कार सहित लगभग 22.33 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, रकम के हस्तांतरण और आरोपियों की कथित भूमिका की पड़ताल कर रही है।

जनवरी 2026 से चल रही थी कथित धोखाधड़ी

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित वित्तीय अनियमितताएं जनवरी 2026 से चल रही थीं। जांच के दौरान खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर कई बार बदले जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध पुलिस विवरण के अनुसार, इस अवधि में लगभग 10 बार मोबाइल नंबर बदलने की बात कही गई है।

आरोप है कि बैंक खातों और नेट बैंकिंग से जुड़ी प्रक्रिया का दुरुपयोग कर खाताधारकों की जानकारी के बिना लेनदेन किए गए। मामले का एक गंभीर पहलू यह भी है कि कुछ खाताधारकों के जीवित होने के बावजूद उनके फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कर एफडी तुड़वाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन सभी आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होना बाकी है।

मोबाइल नंबर बदलकर खातों तक पहुंचने का आरोप

प्रारंभिक जांच के अनुसार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में पदस्थ सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे पर आरोप है कि उन्होंने अपनी बैंकिंग आईडी के माध्यम से नेट बैंकिंग प्रक्रिया का उपयोग कर खाताधारकों के पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलने में भूमिका निभाई। पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया से खातों में होने वाले लेनदेन पर नियंत्रण हासिल करने और रकम निकालने या दूसरे खातों में भेजने जैसी गतिविधियों को अंजाम देने का संदेह है।

आरोपों के मुताबिक, खाताधारकों की एफडी समय से पहले तुड़वाने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों का भी इस्तेमाल किया गया। इस तरह के मामले में बैंक के रिकॉर्ड, एफडी से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल नंबर बदलने की प्रविष्टियां और नेट बैंकिंग लॉग महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन खातों से कितनी राशि का लेनदेन हुआ और प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका रही।

रिश्तेदारों और अन्य खातों में भेजी गई रकम

जांच में यह भी सामने आया है कि खातों से कथित रूप से निकाली गई या स्थानांतरित की गई रकम को रिश्तेदारों और अन्य बैंक खातों में भेजा गया। पुलिस को संदेह है कि कथित धोखाधड़ी से प्राप्त रकम का इस्तेमाल कार सहित दूसरी संपत्तियां खरीदने में किया गया।

पुलिस ने जांच के दौरान संपत्ति जब्त की है। अब यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि जब्त की गई संपत्ति का कथित वित्तीय धोखाधड़ी से क्या संबंध है, रकम किन खातों में पहुंची और लेनदेन की पूरी श्रृंखला में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।

छह शिकायतों पर दर्ज किए गए अलग-अलग अपराध

बोरदेही पुलिस के अनुसार, मोरखा शाखा से संबंधित खाताधारकों की शिकायतों के आधार पर छह अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं। शिकायतों में खातों से बिना अनुमति राशि निकाले जाने या अनधिकृत लेनदेन किए जाने के आरोप शामिल हैं।

प्रमुख शिकायतों का विवरण इस प्रकार है:

  1. ज्योति रघुवंशी का मामला: ग्राम मोरखा निवासी ज्योति रघुवंशी की शिकायत पर उनके खाते से कथित तौर पर 4,86,175 रुपये निकाले जाने के संबंध में सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे और एक विधि विरुद्ध बालक के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया।

  2. फूलवंती का मामला: फूलवंती की शिकायत पर उनकी अनुमति के बिना खाते में कथित रूप से 2,74,000 रुपये का लेनदेन किए जाने के संबंध में गौरव सूर्यवंशी के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया गया।

  3. इंद्रेश रघुवंशी का मामला: इंद्रेश रघुवंशी की शिकायत में उनके बैंक खाते में कथित तौर पर 1,85,786 रुपये का अनधिकृत लेनदेन किए जाने का आरोप है। इस मामले में गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया।

  4. भोजराज सोनी का मामला: भोजराज सोनी की शिकायत पर उनकी अनुमति के बिना खाते में कथित रूप से 5,50,000 रुपये का लेनदेन किए जाने के संबंध में पलाश स्वामी और गौरव सूर्यवंशी के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया।

  5. रागिनी साहू का मामला: 22 अक्टूबर 2026 को दर्ज शिकायत में रागिनी साहू के खाते से कथित तौर पर 1,55,371 रुपये निकाले जाने का आरोप लगाया गया। इस मामले में अज्ञात मोबाइल नंबर धारक और सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत अपराध पंजीबद्ध किए जाने की जानकारी दी गई है।

  6. विवेक सोनी का मामला: 21 अक्टूबर 2026 को दर्ज शिकायत में विवेक सोनी के खाते से कथित रूप से फर्जी तरीके से राशि हस्तांतरित किए जाने का आरोप है। इस मामले में गौरव सूर्यवंशी के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया।

इन सभी मामलों में पुलिस बैंक खातों के विवरण, लेनदेन के रिकॉर्ड और रकम प्राप्त करने वाले खातों की जांच कर रही है। अलग-अलग शिकायतों में बताई गई रकम को पूरे मामले की अंतिम पुष्टि की गई कुल राशि नहीं माना जाना चाहिए। करीब 1.14 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के संबंध में जांच जारी है।

सहायक प्रबंधक सहित दो वयस्क आरोपी, एक विधि विरुद्ध बालक पर कार्रवाई

पुलिस के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को कार्रवाई के दौरान निम्नलिखित लोगों को पकड़ा गया:

  • लुकेश गोखे, उम्र 28 वर्ष: निवासी ग्राम मोवाड, थाना नरखेड़, जिला नागपुर; वर्तमान में मोरखा में रह रहे थे और बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे।

  • गौरव सूर्यवंशी, उम्र 22 वर्ष: निवासी ग्राम मोरखा, थाना बोरदेही, जिला बैतूल।

  • एक विधि विरुद्ध बालक: जिसके संबंध में किशोर न्याय कानून के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई।

पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश खरपुसे और एसडीओपी मुलताई शिवकुमार सिंह के निर्देशन में कार्रवाई की गई। थाना प्रभारी बोरदेही निरीक्षक भैयालाल उईके के नेतृत्व में पुलिस टीम ने जांच और साक्ष्य संकलन किया।

22.33 लाख रुपये की संपत्ति जब्त

पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विवेचना के दौरान आरोपियों से संबंधित स्थानों और विधि विरुद्ध बालक के संबंध में प्राप्त जानकारी के आधार पर निम्न संपत्ति जब्त की गई:

  • छह मोबाइल फोन, अनुमानित कीमत लगभग 65,000 रुपये।

  • सोना, अनुमानित कीमत लगभग 8,28,000 रुपये।

  • चांदी, अनुमानित कीमत लगभग 1,40,000 रुपये।

  • एक कार, अनुमानित कीमत लगभग 12 लाख रुपये।

इस प्रकार जब्त संपत्ति का कुल अनुमानित मूल्य लगभग 22,33,000 रुपये बताया गया है। पुलिस संपत्ति के स्रोत और कथित वित्तीय धोखाधड़ी से उसके संबंध की जांच कर रही है। जब्ती अपने आप में यह साबित नहीं करती कि प्रत्येक वस्तु अवैध रकम से ही खरीदी गई थी; इसका निर्धारण जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

बोरदेही पुलिस और साइबर सेल की भूमिका

इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक भैयालाल उईके के नेतृत्व में बोरदेही पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस टीम में उपनिरीक्षक पंचमसिंह उईके, सहायक उपनिरीक्षक कमलसिंह मेहर, मिंतलाल धुर्वे और हरीराम डंढोरे, प्रधान आरक्षक नागेंद्र सिंह तथा अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे। साइबर सेल बैतूल की टीम ने भी तकनीकी जांच में सहयोग किया।

पुलिस अधीक्षक बैतूल वीरेन्द्र जैन के मार्गदर्शन में मामले की विवेचना जारी है। जांच का उद्देश्य कथित धोखाधड़ी की पूरी राशि, संबंधित खातों और लेनदेन की श्रृंखला तथा मामले में शामिल व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट करना है।

खाताधारक कैसे रहें सतर्क?

इस मामले से बैंक खातों और एफडी की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत सामने आती है। खाताधारकों को चाहिए कि वे समय-समय पर अपने खाते और एफडी का विवरण जांचें, बैंक में दर्ज मोबाइल नंबर में अनधिकृत बदलाव होने पर तत्काल शिकायत करें और किसी के साथ ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग की गोपनीय जानकारी साझा न करें।

यदि खाते से बिना अनुमति रकम निकलने या संदिग्ध लेनदेन का पता चले, तो तुरंत संबंधित बैंक और पुलिस को सूचना दें। ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 का उपयोग किया जा सकता है।

फिलहाल मोरखा बैंक प्रकरण में जांच जारी है। पुलिस की जांच और बैंक रिकॉर्ड के परीक्षण के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितता की पूरी राशि, लेनदेन का तरीका और प्रत्येक आरोपी की भूमिका के संबंध में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। आरोप सिद्ध होने तक संबंधित व्यक्तियों को दोषी नहीं माना जाना चाहिए।

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