Damoh News: पुरैना तालाब की पिचिंग 30-40 मीटर तक धंसी, चैनपुरा और सवा लाख मानस पाठ मार्ग पर सुरक्षा की चिंता
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | 14 अक्टूबर 2026
दमोह, मध्य प्रदेश। दमोह शहर के पुराना थाना क्षेत्र स्थित पुरैना तालाब की पिचिंग कई स्थानों पर धंसने और क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, लगभग 30 से 40 मीटर हिस्से में पिचिंग प्रभावित हुई है। एक-दो स्थानों पर पिचिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई है। तालाब के किनारे की इस स्थिति के बीच सड़क से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा और समय पर मरम्मत कराए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पुरैना तालाब की क्षतिग्रस्त पिचिंग की तस्वीरें
यह मामला केवल तालाब के किनारे की संरचना खराब होने तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी सड़क शहर की बड़ी आबादी को मुख्य बाजार से जोड़ती है। ऐसे में तालाब के आसपास की स्थिति आम नागरिकों के दैनिक आवागमन और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती है।
पुरैना तालाब के किनारे से गुजरती है महत्वपूर्ण सड़क
पुरैना तालाब के किनारे से होकर जाने वाला मार्ग चैनपुरा और कंकाली माता क्षेत्र से होते हुए बायपास तक पहुंचता है। यह मार्ग स्थानीय लोगों के लिए शहर के मुख्य बाजार तक आने-जाने का महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसी कारण इस सड़क पर लोगों और वाहनों का आवागमन बना रहता है।
स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस मार्ग का उपयोग सवा लाख मानस पाठ से जुड़े स्थल तक आने-जाने वाले लोग भी करते हैं। ऐसे में मार्ग और तालाब के किनारे की स्थिति का निरीक्षण कराना महत्वपूर्ण है।
30 से 40 मीटर हिस्से में पिचिंग क्षतिग्रस्त होने की जानकारी
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के मुताबिक, तालाब की पिचिंग लगभग 30 से 40 मीटर तक धंस गई है। एक-दो स्थानों पर पिचिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई है। हालांकि, क्षति की वास्तविक गहराई, इसके पीछे के तकनीकी कारण और तालाब के किनारे की मिट्टी पर इसके प्रभाव का आकलन संबंधित तकनीकी विभाग के निरीक्षण के बाद ही किया जा सकता है।
तालाब की पिचिंग किनारे की मिट्टी को स्थिर रखने और कटाव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए क्षतिग्रस्त हिस्से की तकनीकी जांच कराना जरूरी है, ताकि समस्या की वजह सामने आए और मरम्मत का उचित तरीका तय किया जा सके।
स्थानीय प्रशासन की लापरवाही कहीं किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार तो नहीं?
पुरैना तालाब के किनारे पिचिंग का धंसना और एक-दो स्थानों पर उसका पूरी तरह क्षतिग्रस्त होना चिंता का विषय है। जिस मार्ग से बड़ी आबादी का आवागमन होता है, उसके किनारे ऐसी स्थिति नागरिकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करती है। क्या संबंधित अधिकारी समय रहते क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण कर सुरक्षा और मरम्मत के आवश्यक कदम उठाएंगे? नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी अनहोनी से पहले कार्रवाई करना जरूरी है।
स्थानीय निवासी राहुल शास्त्री ने उठाए सवाल
News Yug 24 की टीम ने पुरैना तालाब की स्थिति को लेकर स्थानीय निवासी राहुल शास्त्री से बातचीत की।
राहुल शास्त्री ने स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुरैना तालाब की समस्या को मीडिया पहले भी कवर कर चुका है। उनके अनुसार, संबंधित अधिकारियों को समस्या की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने आशंका जताई कि शायद प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
ये आरोप राहुल शास्त्री के बयान पर आधारित हैं। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और समस्या के समाधान को लेकर उनकी प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जाना चाहिए।
पुरैना तालाब की मरम्मत के साथ संरक्षण पर भी ध्यान जरूरी
शहरी तालाब केवल जल संग्रह के स्रोत नहीं होते, बल्कि स्थानीय पर्यावरण, जल निकासी और पारंपरिक जल संरचनाओं से भी जुड़े होते हैं। ऐसे में पुरैना तालाब के किनारे की क्षतिग्रस्त पिचिंग की मरम्मत के साथ तालाब की समग्र स्थिति का निरीक्षण भी उपयोगी होगा।
संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत की जिम्मेदारी किस विभाग के पास है, निरीक्षण कब कराया जाएगा और सुरक्षा व मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
जिम्मेदार विभाग से अपेक्षित कार्रवाई
पुरैना तालाब की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इन बिंदुओं पर ध्यान दिया जाना जरूरी है:
- क्षतिग्रस्त पिचिंग का मौके पर निरीक्षण और वास्तविक लंबाई का मापन।
- पिचिंग धंसने के कारणों की तकनीकी जांच।
- जरूरत के अनुसार दुर्घटना की आशंका वाले स्थानों पर चेतावनी संकेत और सुरक्षा इंतजाम।
- क्षतिग्रस्त हिस्से की स्थायी मरम्मत के लिए कार्ययोजना।
- तालाब के संरक्षण और नियमित निगरानी की व्यवस्था।
News Yug 24 का जनहित का सवाल
जब पुरैना तालाब के किनारे की पिचिंग 30 से 40 मीटर तक क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आ रही है, तो संबंधित विभाग नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएगा? स्थल का निरीक्षण कब होगा और मरम्मत की समयसीमा क्या होगी? इन सवालों पर विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | News Yug 24
यह रिपोर्ट स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई गई जानकारी और स्थानीय निवासी से बातचीत के आधार पर तैयार की गई है। क्षति के कारणों, संबंधित विभाग की जिम्मेदारी और प्रस्तावित कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
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