दमोह रजिस्ट्री कार्यालय में अनियमितताएं: कलेक्टर सख्त, पुलिस करेगी जांच

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दमोह रजिस्ट्री कार्यालय में अनियमितताओं पर कलेक्टर सख्त, अवैध वसूली की शिकायतों की जांच करेगी पुलिस

दमोह | 15 अक्टूबर 2026 — दमोह के रजिस्ट्री कार्यालय में कथित अवैध वसूली, जमीनों के फर्जी विक्रय और राजस्व चोरी से जुड़ी शिकायतों को लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर ने कार्यालय का औचक निरीक्षण कर संदिग्ध गतिविधियों की जांच के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एक अनधिकृत व्यक्ति के पास रजिस्टर मिलने पर उसे जब्त कराया गया। वहीं, टेबल पर मिली नकदी और ऑफलाइन टोकन के नाम पर कथित वसूली के मामले की वास्तविकता का पता लगाने के लिए पुलिस जांच की जाएगी।

दमोह रजिस्ट्री कार्यालय के निरीक्षण के बाद पुलिसकर्मी संदिग्ध व्यक्ति का मोबाइल जांचते हुएदमोह सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में फर्जी टोकन वसूली का भंडाफोड़, पुलिस जांच में जुटी; संदिग्ध का फोन जब्त

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, आम नागरिकों और किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाना तथा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों पर कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिकता है।

‘उर्फ’ के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री कराने की शिकायतें

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि प्रशासन को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं, जिनमें मूल भू-स्वामी के नाम के आगे ‘उर्फ’ लगाकर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर जमीन का विक्रय कराए जाने की आशंका जताई गई थी।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि जमीन मुकेश के नाम पर दर्ज है, तो कथित तौर पर ‘सुरेश उर्फ मुकेश’ जैसे नाम का इस्तेमाल कर दस्तावेजों के आधार पर जमीन बेचने की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसी स्थिति में वास्तविक भू-स्वामी के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं और उसे बाद में अपनी जमीन के लिए परेशान होना पड़ सकता है।

प्रशासन इन शिकायतों की जांच कर यह पता लगाएगा कि जमीनों के विक्रय में पहचान और स्वामित्व से संबंधित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

नजूल और पट्टे की जमीनों के विक्रय पर भी सवाल

कलेक्टर के अनुसार, दूसरी तरह की शिकायतें नजूल की जमीनों और पट्टे पर आवंटित ऐसी जमीनों से संबंधित हैं, जिनके हस्तांतरण पर प्रतिबंध है या जिनके विक्रय के लिए अनुमति आवश्यक होती है।

शिकायतों में आरोप है कि कुछ मामलों में आवश्यक अनुमति के बिना ही ऐसी जमीनों का विक्रय कराया जा रहा है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

मकान बने होने के बावजूद प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की शिकायत

रजिस्ट्री कार्यालय में सामने आई तीसरी प्रमुख शिकायत कॉलोनियों में बने मकानों के दस्तावेजी पंजीयन से संबंधित है। कलेक्टर ने बताया कि शिकायतें मिली थीं कि जहां मकान निर्मित हैं, वहां मकान की रजिस्ट्री कराने के बजाय केवल प्लॉट की रजिस्ट्री कराई जाती है।

ऐसा होने पर शासन को मिलने वाली स्टांप ड्यूटी और अन्य देय राजस्व में नुकसान होने की आशंका रहती है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा।

संपदा 2.0 पोर्टल के बावजूद अलग रजिस्टर में टोकन की एंट्री क्यों?

औचक निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने कार्यालय में एक रजिस्टर रखा हुआ पाया, जिसमें लोगों की एंट्री की जा रही थी। वहां मौजूद एक युवक के संबंध में भी जानकारी ली गई।

कलेक्टर ने बताया कि शासन द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए ‘संपदा 2.0’ पोर्टल लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत टोकन ऑनलाइन बुक और जनरेट होते हैं तथा संबंधित व्यक्ति को संदेश के माध्यम से जानकारी मिलती है।

ऐसे में ऑफलाइन टोकन के नाम पर अलग से रजिस्टर में एंट्री किए जाने और लोगों से अनुचित अपेक्षा रखने की शिकायत की जांच जरूरी थी। मौके पर रजिस्टर मिलने के बाद उसे जब्त करा दिया गया है। कलेक्टर के मुताबिक, आगे की कार्रवाई जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

टेबल पर मिली नकदी की जांच पुलिस करेगी

निरीक्षण के दौरान एक टेबल पर नकदी भी दिखाई दी। कलेक्टर ने बताया कि पैसे के संबंध में पूछे जाने पर उसे सर्विस प्रोवाइडर का बताया गया। सर्विस प्रोवाइडर की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि राशि किसी अन्य व्यक्ति को देने के लिए लाई गई थी।

हालांकि, नकदी किसकी थी, किस उद्देश्य से रखी गई थी और क्या उसका संबंध किसी अनुचित लेनदेन से था, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पुलिस जांच के माध्यम से वास्तविकता का पता लगाया जाएगा और तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

सात दिन से बैठने की बात कह रहा था युवक

कलेक्टर ने बताया कि रजिस्टर के पास मौजूद युवक ने कथित तौर पर कहा कि वह पिछले सात दिनों से वहां बैठ रहा था और बेरोजगार था। प्रशासन अब यह भी जांच करेगा कि उसे कार्यालय में बैठने की अनुमति किसने दी और वह किस उद्देश्य से वहां काम कर रहा था।

कलेक्टर के अनुसार, कार्यालय के अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि उनके परिसर में कोई अनधिकृत व्यक्ति बैठकर लोगों से संपर्क न करे, अलग से एंट्री न करे या किसी प्रकार की अनुचित वसूली की स्थिति पैदा न हो। कार्यालय परिसर में अधिकृत व्यक्तियों की मौजूदगी और निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

निर्धारित शुल्क से अधिक राशि देने की जरूरत नहीं

कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने आम नागरिकों और किसानों से अपील की कि रजिस्ट्री के लिए केवल शासन द्वारा निर्धारित शुल्क ही जमा करें। ऑनलाइन रसीद में स्टांप ड्यूटी, पंचायत उपकर या नगरीय क्षेत्र के उपकर जैसी देय राशियों का विवरण स्पष्ट रहता है। इसके अतिरिक्त संबंधित सेवा के लिए निर्धारित सर्विस प्रोवाइडर शुल्क ही लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दस्तावेज लेखक की फीस भी निर्धारित दरों के अनुसार ही ली जानी चाहिए। यदि कोई वेंडर या सेवा प्रदाता निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगता है या अनुचित अपेक्षा रखता है, तो नागरिक प्रशासन के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पूरे जिले में लगाए जाएंगे शुल्क के सूचना बोर्ड

प्रशासन की ओर से जिले के रजिस्ट्री कार्यालयों और सर्विस प्रोवाइडर से संबंधित स्थानों पर निर्धारित फीस की जानकारी देने वाले बोर्ड लगवाने की तैयारी है। इन बोर्डों के माध्यम से आम नागरिकों को बताया जाएगा कि किस कार्य के लिए कितनी राशि देय है और किन शुल्कों के अतिरिक्त कोई दूसरी फीस नहीं ली जानी चाहिए।

कलेक्टर ने कहा कि इस संबंध में निर्देश जारी किए जाएंगे और संबंधित लोगों की बैठक लेकर व्यवस्था को स्पष्ट किया जाएगा। उद्देश्य यह है कि आम नागरिकों और किसानों को शुल्क की सही जानकारी मिले तथा वे अनावश्यक भुगतान और परेशानी से बच सकें।

जांच के बाद दोषियों पर होगी वैधानिक कार्रवाई

दमोह रजिस्ट्री कार्यालय में हुई इस कार्रवाई के बाद अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। प्रशासन को यह पता लगाना है कि अलग रजिस्टर में एंट्री किस उद्देश्य से की जा रही थी, नकदी का वास्तविक स्रोत और प्रयोजन क्या था, युवक को कार्यालय में बैठने की अनुमति किसने दी तथा जमीनों के विक्रय से जुड़ी शिकायतों में कितनी सच्चाई है।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का जोर रजिस्ट्री व्यवस्था को पारदर्शी, व्यवस्थित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने पर है, ताकि जमीनों के पंजीयन का कार्य समय पर और विधिसम्मत तरीके से संपन्न हो सके।

न्यूज़ क्रेडिट: News Yug 24

नोट: यह समाचार कलेक्टर के उपलब्ध कराए गए बयान और निरीक्षण संबंधी जानकारी पर आधारित है। कथित अनियमितताओं, नकदी और जमीनों के विक्रय से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित जांच के निष्कर्षों के बाद ही होगी।


वीडियो देखें: दमोह रजिस्ट्री कार्यालय का औचक निरीक्षण


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