Damoh News: फर्जी रजिस्ट्री और टोकन के नाम पर वसूली की शिकायतों पर बड़ा एक्शन, दो उप-पंजीयक निलंबित
दमोह, 27 अक्टूबर 2026 |
दमोह। जिले के पंजीयन कार्यालयों में कथित अनियमितताओं, जमीन की रजिस्ट्री में गड़बड़ी और टोकन के नाम पर अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायतों को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर उप-पंजीयक विमल कुमार साहू और ज्योति पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया है कि जांच में जो भी व्यक्ति अनियमितताओं में दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना, भूमि स्वामियों के अधिकारों की रक्षा करना और आम नागरिकों को निर्धारित शुल्क से अधिक राशि देने से बचाना है।
आकस्मिक निरीक्षण और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई
पंजीयन कार्यालयों में अनियमितताओं को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने संबंधित कार्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कराया और अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम) से विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर दो उप-पंजीयकों के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि भूमि के वास्तविक स्वामित्व, दस्तावेजों की जांच और रजिस्ट्री की वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। इन प्रक्रियाओं में लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा।
इससे पहले 15 अक्टूबर 2026 को दमोह में पंजीयन कार्यालय के औचक निरीक्षण के दौरान संपदा 2.0 पोर्टल पर ऑनलाइन टोकन व्यवस्था के बावजूद अलग रजिस्टर में टोकन संबंधी प्रविष्टियां किए जाने का मामला भी सामने आया था। उस दौरान रजिस्टर जब्त कर आगे की जांच और वैधानिक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
महिला के नाम की जमीन की बिक्री का मामला आया सामने
जांच में एक ऐसा मामला सामने आने की बात कही गई है, जिसमें जमीन महिला के नाम पर दर्ज थी, लेकिन उसकी बिक्री पुरुष द्वारा किए जाने का मामला सामने आया। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी थी कि विक्रेता के अधिकारों और प्रस्तुत दस्तावेजों की समुचित जांच की जाए।
प्रशासन के अनुसार, प्रथम दृष्टया आवश्यक जांच के बिना रजिस्ट्री किए जाने को गंभीर लापरवाही माना गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है।
भूमि की रजिस्ट्री करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि दस्तावेजों में दर्ज भूमि स्वामी और विक्रेता के अधिकारों का उचित सत्यापन किया गया हो। यदि स्वामित्व या विक्रय अधिकार को लेकर कोई संदेह हो, तो नियमानुसार उसकी जांच की जानी चाहिए।
जबेरा क्षेत्र की जमीन की बटियागढ़ में रजिस्ट्री का मामला
प्रशासन के सामने एक अन्य मामला भी आया है, जिसमें संबंधित भूमि जबेरा उप-पंजीयक के कार्यक्षेत्र के एक गांव की बताई गई है, लेकिन उसकी रजिस्ट्री बटियागढ़ में किए जाने की जानकारी सामने आई।
बताया गया है कि इस प्रक्रिया में जबेरा की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का उपयोग किया गया। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसमें शामिल व्यक्तियों की भूमिका की जांच और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की बात कही है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भूमि पंजीयन में संबंधित दस्तावेजों, अधिकारों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। जांच में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, इस मामले में जांच के अंतिम निष्कर्ष और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
रजिस्ट्री लेखन शुल्क ₹1,000, अतिरिक्त राशि देने से बचें
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने जिला पंजीयक और सभी उप-पंजीयकों को निर्देश दिए हैं कि पंजीयन कार्यालयों में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए।
इसके लिए कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर शुल्क सूची लगाने के साथ दीवारों पर भी जानकारी लिखवाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नागरिकों को रजिस्ट्री कराने से पहले ही निर्धारित शुल्क की जानकारी मिल सके।
कलेक्टर के अनुसार, रजिस्ट्री लेखन के लिए ₹1,000 शुल्क निर्धारित है। इसके अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी, पंजीयन शुल्क, पंचायत उपकर तथा अन्य लागू शुल्क का विवरण रजिस्ट्री के प्रथम पृष्ठ पर अंकित रहता है।
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे संबंधित दस्तावेज में दर्ज शुल्क और लागू सरकारी दरों के अनुसार ही भुगतान करें। किसी व्यक्ति द्वारा टोकन दिलाने, फाइल आगे बढ़ाने या रजिस्ट्री कराने के नाम पर अनावश्यक राशि मांगे जाने पर शिकायत दर्ज कराएं।
ध्यान दें: ₹1,000 का उल्लेख रजिस्ट्री लेखन शुल्क के लिए है। इसे स्टाम्प ड्यूटी और अन्य लागू पंजीयन शुल्क सहित पूरी रजिस्ट्री की कुल लागत न समझें।
टोकन के नाम पर वसूली या परेशानी होने पर कहां करें शिकायत?
कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि पंजीयन कार्यालयों में यदि कोई व्यक्ति निर्धारित शुल्क से अधिक राशि मांगता है, टोकन के नाम पर परेशान करता है या अनावश्यक भुगतान के लिए दबाव बनाता है, तो इसकी शिकायत प्रशासन द्वारा स्थापित कंट्रोल रूम नंबर पर करें।
इसके साथ ही संबंधित एसडीएम और जिला पंजीयक के संपर्क नंबर भी कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएंगे, जिससे आम नागरिक अपनी शिकायत सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें।
यदि शिकायत करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं होता है, तो नागरिक कलेक्टर के फेसबुक पेज पर कमेंट के माध्यम से भी प्रशासन को जानकारी दे सकते हैं। प्रशासन ने शिकायतों पर तत्परता से कार्रवाई करने और नागरिकों को नियमानुसार सेवाएं उपलब्ध कराने की बात कही है।
बाहरी व्यक्तियों की भूमिका पर भी प्रशासन की नजर
पंजीयन कार्यालयों में बाहरी व्यक्तियों की भूमिका और टोकन के नाम पर कथित वसूली की शिकायतें भी प्रशासन के संज्ञान में आई हैं। ऐसे मामलों में यह पता लगाना जरूरी है कि कार्यालय परिसर में बैठने वाले व्यक्तियों को किस आधार पर अनुमति दी गई और पंजीयन प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही।
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बावजूद अलग रजिस्टर में टोकन प्रविष्टियों का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
शुल्क सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने और शिकायत के लिए संपर्क नंबर उपलब्ध कराने से नागरिकों को अनावश्यक परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।
कलेक्टर का स्पष्ट संदेश: अनियमितता करने वालों पर होगी कार्रवाई
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने स्पष्ट किया है कि पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना, आमजन को अनावश्यक परेशानी से बचाना और अनियमितताओं पर प्रभावी कार्रवाई करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
प्रशासन की ओर से नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे निर्धारित शुल्क से अधिक राशि का भुगतान न करें और किसी प्रकार की अनुचित मांग होने पर उसकी शिकायत करें।
दो उप-पंजीयकों का निलंबन और पंजीयन कार्यालयों में शुल्क संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश इस दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं। अब संबंधित मामलों की जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
नोट: उप-पंजीयकों के निलंबन संबंधी विवरण उपलब्ध कराई गई प्रशासनिक जानकारी पर आधारित हैं। निलंबन को विभागीय कार्रवाई के रूप में समझा जाए; इसे अपने आप में आपराधिक दोष सिद्ध होना नहीं माना जाना चाहिए।
News Yug 24 | दमोह, मध्य प्रदेश
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