दमोह के 6 राजस्व न्यायालयों में गड़बड़ी पर बड़ी कार्रवाई: तहसीलदार रोबिन जैन और प्रवाचक प्रियांक कोरी निलंबित, एसडीएम पद से हटाए गए; 7 को नोटिस
दमोह। जिले में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। तहसील दमयंती नगर सहित दमोह के छह राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली के निरीक्षण के बाद तहसीलदार रोबिन जैन को निलंबित कर दिया गया है। तत्कालीन न्यायालय प्रवाचक एवं सहायक ग्रेड-3 प्रियांक कोरी को भी निलंबित किया गया है। एसडीएम दमोह को पद से हटाकर उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। इसके अलावा सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
- तहसीलदार रोबिन जैन और प्रियांक कोरी के निलंबन की जानकारी।
- राजस्व प्रकरणों में नोटिस की तामील और सुनवाई से जुड़ी कथित कमियां।
- जुर्माना वसूली के रिकॉर्ड में सामने आई अनियमितताएं।
- एसडीएम को पद से हटाने और सात अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस की कार्रवाई।
- दमोह में प्रशासनिक कामकाज के लिए की गई नई व्यवस्था।
आदेशों और संबंधित तस्वीरों का फोटो स्लाइडर
यह कार्रवाई राजस्व प्रकरणों के निराकरण में कथित प्रक्रियागत कमियों, अधिकारिता के बिना आदेश पारित करने, संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए बिना आवेदन निरस्त करने तथा जुर्माने की राशि जमा कराए बिना प्रकरण बंद किए जाने जैसे गंभीर बिंदुओं के सामने आने के बाद की गई है। प्रशासनिक कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली, प्रकरणों के रिकॉर्ड और सरकारी राजस्व की वसूली को लेकर जवाबदेही का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
जनसुनवाई में शिकायतों के बाद छह न्यायालयों की जांच
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजस्व मामलों के निराकरण में अनियमितताओं और आवेदकों को हो रही परेशानियों के संबंध में जनसुनवाई सहित अन्य माध्यमों से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसके बाद एसडीएम न्यायालय, तहसीलदार न्यायालय और राजस्व निरीक्षक कार्यालयों की कार्यप्रणाली का निरीक्षण कराया गया।
जांच के दौरान प्रकरणों के निराकरण, आदेश पारित करने की प्रक्रिया, नोटिस की तामील, जुर्माना वसूली और अभिलेखों के संधारण जैसे बिंदुओं की समीक्षा की गई। निरीक्षण रिपोर्ट में सामने आई कमियों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर कार्रवाई की गई।
प्रशासनिक कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य राजस्व मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना और शिकायतों के निराकरण में जवाबदेही तय करना है।
अधिकारिता के बिना आदेश और सुनवाई के अवसर पर उठे सवाल
छह राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के संबंध में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ प्रकरणों में अधिकारिता के बिना आदेश पारित किए जाने और संबंधित आवेदकों को सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिए बिना आवेदन निरस्त करने या प्रकरण नस्तीबद्ध करने जैसी अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है।
राजस्व न्यायालयों में जमीन, नामांतरण, सीमांकन, अतिक्रमण और अन्य राजस्व विवादों से जुड़े मामलों का निराकरण निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है। ऐसी प्रक्रिया में संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देना, नोटिस की तामील सुनिश्चित करना और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नियमानुसार निर्णय लेना आवश्यक होता है।
यदि किसी मामले में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होता है, तो संबंधित पक्षों के अधिकार और प्रकरण के निष्पक्ष निराकरण पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से निरीक्षण में दर्ज प्रक्रियागत कमियों को प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में सभी छह न्यायालयों के प्रत्येक प्रकरण का पूरा ब्यौरा और प्रभावित आवेदकों की संख्या स्पष्ट नहीं है।
तहसीलदार रोबिन जैन को संभागायुक्त कार्यालय ने किया निलंबित
तहसील दमयंती नगर में पदस्थ तहसीलदार रोबिन जैन के निलंबन का आदेश सागर संभागायुक्त कार्यालय द्वारा 9 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, राजस्व प्रकरणों के निराकरण, नामांतरण, शासकीय भूमि से जुड़े अतिक्रमण के मामलों और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन में कथित लापरवाही तथा प्रक्रियागत त्रुटियों के संबंध में कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि में रोबिन जैन का मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय, दमोह निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है। इस दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
यह कार्रवाई राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा है। संबंधित आरोपों के अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर तय होंगे।
न्यायालय प्रवाचक प्रियांक कोरी भी निलंबित
तहसीलदार के निलंबन के बाद कलेक्टर कार्यालय दमोह से तत्कालीन न्यायालय प्रवाचक एवं सहायक ग्रेड-3 प्रियांक कोरी के विरुद्ध भी निलंबन आदेश जारी किया गया।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के कार्यालय से 9 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश क्रमांक क./स्था.लि./एससीएन./117/2026 में तहसीलदार न्यायालय दमयंती नगर, दमोह तथा हिरदेपुर राजस्व निरीक्षक मंडल के आकस्मिक निरीक्षण का उल्लेख है।
आदेश के अनुसार, कमिश्नर सागर संभाग के पत्र क्रमांक 594, दिनांक 21 जुलाई 2026 तथा जनसुनवाई और अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों के बाद 30 सितंबर 2026 को निरीक्षण कराया गया था। डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार दुबे ने निरीक्षण किया और 9 अक्टूबर 2026 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
प्रतिवेदन में तत्कालीन न्यायालय प्रवाचक प्रियांक कोरी के कार्यकाल से संबंधित गंभीर अनियमितताएं दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
दो राजस्व प्रकरणों में नोटिस जारी होने के बाद आगे की कार्रवाई नहीं
आदेश में राजस्व प्रकरण क्रमांक 06/अ-68/2026-27, आवेदक सुरेश छाबड़ा और प्रकरण क्रमांक 05/अ-68/2026-27, आवेदक संजय राय का उल्लेख है।
आदेश के अनुसार, इन दोनों मामलों में 25 मई 2026 को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निरीक्षण की तारीख तक आगे की कार्रवाई नहीं हुई थी। जारी नोटिसों की प्रतियां प्रकरणों में संलग्न मिलीं, जबकि संबंधित अतिक्रमणकर्ताओं को तामील के लिए नोटिस भेजे जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला।
यह बिंदु इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि नोटिस की विधिवत तामील से संबंधित पक्षों को मामले की जानकारी देने और नियमानुसार सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
जुर्माना वसूली के रिकॉर्ड में भी मिलीं कमियां
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जारी आदेश में वर्ष 2025-26 और 2026-27 के अर्थदंड पंजी से संबंधित कमियों का भी उल्लेख है।
आदेश के मुताबिक, हिरदेपुर और दमयंती नगर राजस्व निरीक्षक मंडल में दर्ज प्रकरणों की जुर्माना राशि के चालान क्रमांक और वसूली की तारीख जैसी जानकारियां दर्ज नहीं थीं। साथ ही, वसूली के लिए अलग से प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी भी नहीं मिली।
आदेश में इस स्थिति से शासकीय राशि की हानि होने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में कथित वित्तीय नुकसान की कुल राशि स्पष्ट नहीं की गई है।
प्रियांक कोरी के विरुद्ध कार्रवाई में मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3 के उपनियम (i), (ii) और (iii) के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय बटियागढ़ निर्धारित किया गया है।
एसडीएम को पद से हटाया, शासन को भेजा गया प्रस्ताव
राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के बाद एसडीएम दमोह को तत्काल प्रभाव से पद से हटाए जाने और उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।
यह कार्रवाई प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि निरीक्षण के बाद केवल तहसील स्तर के कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ स्तर की जिम्मेदारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक विवरण में संबंधित एसडीएम का नाम, उनके विरुद्ध प्रस्तावित कार्रवाई का पूरा विवरण और शासन स्तर पर आगे हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित आदेश की पुष्टि आवश्यक है।
सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद सात अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनसे संबंधित मामलों में जवाब मांगा गया है।
नोटिस जारी होने का अर्थ है कि संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है। उनके जवाबों और उपलब्ध अभिलेखों की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही है। दो कर्मचारियों के निलंबन और एसडीएम को पद से हटाए जाने के साथ अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
प्रशासनिक कामकाज के लिए नई व्यवस्था
कार्रवाई के बाद राजस्व और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की गई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार दुबे को एसडीएम दमोह का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, नायब तहसीलदार रघुनंदन चतुर्वेदी को उनके वर्तमान दायित्वों के साथ तहसील दमयंती नगर के प्रभारी तहसीलदार का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यह व्यवस्था आगामी आदेश तक प्रभावी रहने की जानकारी दी गई है।
इस व्यवस्था के तहत राजस्व प्रकरणों की सुनवाई, कार्यालयीन कार्यवाही और आम नागरिकों से संबंधित प्रशासनिक कामकाज जारी रखने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों पर होगी।
आम नागरिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कार्रवाई?
राजस्व न्यायालयों में जमीन के विवाद, नामांतरण, सीमांकन, शासकीय भूमि पर अतिक्रमण और जुर्माना वसूली जैसे मामले सीधे आम नागरिकों के हितों से जुड़े होते हैं। इन मामलों में समय पर कार्रवाई, रिकॉर्ड का सही संधारण और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।
यदि नोटिस की तामील में देरी होती है, प्रकरणों का समय पर निराकरण नहीं होता या जुर्माना वसूली का रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखा जाता, तो नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में निरीक्षण और उसके बाद हुई कार्रवाई से राजस्व न्यायालयों के कामकाज की निगरानी, रिकॉर्ड की पारदर्शिता और लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान बढ़ने की उम्मीद है।
इस मामले में आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कारण बताओ नोटिस पाने वाले अधिकारी-कर्मचारी क्या जवाब देते हैं, विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष सामने आते हैं और जुर्माना वसूली से संबंधित कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष
दमोह के छह राजस्व न्यायालयों के निरीक्षण के बाद हुई कार्रवाई में तहसीलदार रोबिन जैन और न्यायालय प्रवाचक प्रियांक कोरी का निलंबन, एसडीएम को पद से हटाना और सात अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस जारी करना प्रमुख घटनाक्रम हैं। अब विभागीय जांच, अभिलेखों की समीक्षा और आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रहेगी।
विशेष ग्राउंड रिपोर्ट | News Yug 24
स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारी और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार रिपोर्ट।
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