दमोह में धीरेंद्र शास्त्री का हुंकार भरा संबोधन: हिंदू एकता, नशामुक्ति और गौ-संरक्षण पर दिया जोर

गर्भवती गौमाता की घटना का जिक्र कर गौ-संरक्षण पर उठाई आवाज, दमोह को नशामुक्त बनाने और युवाओं को दिया संदेश

दमोह, 13 अक्टूबर 2026। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सनातन हिंदू एकता रथयात्रा मंगलवार को दमोह पहुंची। शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने हिंदू एकता, जातिगत भेदभाव समाप्त करने, नशामुक्त समाज बनाने और गौ-संरक्षण जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। इसी दौरान उन्होंने मार्च में दमोह के पास अजब धाम में कथा आयोजित करने और दिव्य दरबार लगाने की घोषणा भी की।

दमोह पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का संबोधन
Caption: दमोह के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में सनातन हिंदू एकता रथयात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित करते पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री।

इससे पहले सोमवार, 12 अक्टूबर की देर रात पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हटा पहुंचे थे। पन्ना और अमानगंज की ओर से हटा पहुंचे शास्त्री का देव श्री गौरीशंकर मंदिर परिसर में शिष्य मंडल और श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। इस दौरान जय श्रीराम के जयकारों से परिसर गूंज उठा। हटा में धार्मिक कार्यक्रम और दिव्य दरबार के बाद मंगलवार को रथयात्रा पटेरा, हिंडोरिया और समन्ना होते हुए दमोह पहुंची।

'जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई'

दमोह के पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन हिंदू एकता रथयात्रा पांच जिलों से होकर गुजर रही है और इसका उद्देश्य हिंदुओं को एकजुट करना है। उन्होंने नारा दिया— “जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।”

उन्होंने हिंदू एकता का अर्थ समझाते हुए कहा कि जिस तरह श्रद्धालु उनके स्वागत के लिए घरों से निकलकर फूल-मालाएं लेकर पहुंचे हैं, उसी तरह किसी हिंदू पर मुसीबत आने पर भी लोगों को उसके साथ खड़ा होना चाहिए। उनके अनुसार, एकता का अर्थ केवल नारे लगाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करना है।

उन्होंने समाज में आपसी मतभेद और जातिगत भेदभाव समाप्त करने की अपील करते हुए कहा कि सनातनी समाज को ऐसा होना चाहिए कि किसी व्यक्ति पर संकट आने पर पूरा समाज उसके साथ खड़ा दिखाई दे।

अपने संबोधन में उन्होंने रामानंदाचार्य से जुड़ी पंक्ति— “हरि को भजे सो हरि को होई, जात-पात पूछे नहीं कोई”—का उल्लेख भी किया और इसे जातिगत भेदभाव से ऊपर उठने के संदेश के रूप में प्रस्तुत किया।

दमोह को नशामुक्त बनाने का आह्वान

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने रथयात्रा के दूसरे संकल्प के रूप में नशामुक्त समाज की बात रखी। उन्होंने दमोहवासियों से अपील की कि वे शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने का संकल्प लें।

उन्होंने कहा कि नशा समाज का नाश करता है और परिवारों पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। उनके संबोधन में दमोह को नशामुक्त बनाने की अपील प्रमुखता से सामने आई।

गर्भवती गौमाता की हत्या की घटना का किया उल्लेख

अपने भाषण में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दमोह में गर्भवती गौमाता की हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए नाराजगी जताई। उन्होंने गौ-वध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग को रथयात्रा के तीसरे संकल्प के रूप में रखा।

उन्होंने कहा कि इस तरह की घटना के बाद समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि साधु का काम लोगों को जगाना है और उनका उद्देश्य समाज में जागरूकता पैदा करना है।

गौ-संरक्षण के संदेश के साथ उन्होंने लोगों से गौमाता के सम्मान और संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की। संबोधन के दौरान उन्होंने “गौमाता राष्ट्रमाता” का नारा भी लगवाया।

मार्च में दमोह के पास अजब धाम पर कथा और दिव्य दरबार

कार्यक्रम के दौरान दमोह में दोबारा आने के सवाल पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मार्च में कथा आयोजित करने की घोषणा की। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि मार्च के महीने में दमोह के पास अजब धाम में कथा होगी और वहां दिव्य दरबार भी लगाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि दमोह के शिष्य मंडल से उनका विशेष लगाव है। उन्होंने मंडल की सेवा भावना की सराहना करते हुए बताया कि यहां के लोग कन्याओं के विवाह सहित विभिन्न सेवा कार्यों में सहयोग करते हैं।

शास्त्री ने कहा कि कार्यक्रम में भीड़ और व्यवस्थाओं के कारण शिष्य मंडल से मिलने में कठिनाई हो रही है। उन्होंने जरूरत पड़ने पर मंडल के सदस्यों को धाम बुलाकर मुलाकात करने की बात भी कही।

मार्च में प्रस्तावित कथा और दिव्य दरबार की घोषणा कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में रही। हालांकि, कथा की सटीक तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की जानकारी अलग से सामने आना बाकी है।

बेटियों और युवाओं को दिया संदेश

अपने संबोधन में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बेटियों और युवाओं को लेकर भी कई बातें कहीं। नवरात्रि और गरबा आयोजनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पहचान छिपाकर प्रवेश करने वाले लोगों को लेकर चिंता जताई और आयोजकों से सतर्कता बरतने की अपील की।

उन्होंने सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से संपर्क करते समय सावधानी रखने की बात भी कही। इंस्टाग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की तस्वीर सुंदर होने से उसके चरित्र के बारे में निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। युवाओं को साथी चुनते समय सुंदरता के बजाय समझदारी और व्यवहार को महत्व देने का संदेश दिया।

उन्होंने बेटियों से माता-पिता के प्रति प्रेम और सम्मान बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मोहब्बत के साथ परिवार और माता-पिता के महत्व को भी समझना चाहिए।

'घर से न निकले तो सबसे बड़े बुजदिल' वाले बयान की भी चर्चा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दमोह दौरे से जुड़ी चर्चा में उनका यह कथन भी सामने आया— “घर से न निकले तो तुम सबसे बड़े बुजदिल।” इसके साथ दमोह में मार्च के महीने में कथा और दिव्य दरबार आयोजित करने की घोषणा भी चर्चा का विषय बनी।

दमोह शिष्य मंडल की सेवा की सराहना

कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भंडारे और मंच की व्यवस्था में सहयोग देने वाले लोगों की प्रशंसा की। उन्होंने टंडन जी सहित सेवा कार्यों में जुटे सदस्यों को धन्यवाद दिया और श्रद्धालुओं से शिष्य मंडल के लिए तालियां बजाकर आभार व्यक्त करने को कहा।

अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने श्रद्धालुओं से हिंदू एकता, नशामुक्ति और गौ-संरक्षण के संकल्पों को याद रखने की अपील की। इसके बाद मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच उन्होंने दमोह से आगे सागर जाने की बात कही। उन्होंने बताया कि इसके बाद उनकी यात्रा टीकमगढ़ की ओर बढ़ेगी।

दमोह में तीन प्रमुख संकल्पों पर रहा जोर

पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में हुए संबोधन का मुख्य केंद्र तीन संदेश रहे—जातिगत भेदभाव समाप्त कर आपसी सहयोग बढ़ाना, नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प लेना और गौ-संरक्षण के लिए जागरूकता पैदा करना। इसके साथ मार्च में अजब धाम पर कथा और दिव्य दरबार आयोजित करने की घोषणा ने दमोह में उनके आगामी कार्यक्रम को लेकर श्रद्धालुओं की उत्सुकता बढ़ाई।

न्यूज़ क्रेडिट: News Yug 24
यह रिपोर्ट कार्यक्रम के दौरान दिए गए संबोधन और उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।

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