दमोह अनाथ आश्रम की शासकीय जमीन पर 23 दुकानों का आरोप, जांच की मांग

 

दमोह में अनाथ आश्रम की शासकीय जमीन पर 23 दुकानों का आरोप, कलेक्टर से जांच और सीमांकन की मांग

स्टेशन रोड स्थित धर्मस्य अनाथ आश्रम दान प्रबंधन की जमीन को लेकर शिकायत; शिकायतकर्ता ने खसरा क्रमांक 456/2 पर कथित अतिक्रमण की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की

दमोह में अनाथ आश्रम की शासकीय जमीन और कथित दुकानों से संबंधित तस्वीरें।

क्या है पूरा मामला?

दमोह, 23 सितंबर 2026। शहर के स्टेशन रोड स्थित धर्मस्य अनाथ आश्रम दान प्रबंधन (11) की शासकीय भूमि को लेकर 23 दुकानों के कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। इस संबंध में मागंज वार्ड नंबर-3 निवासी अजय यादव ने कलेक्टर दमोह को शिकायत देकर जमीन की जांच, सीमांकन और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में भूमि का खसरा क्रमांक 456/2 बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस जमीन पर लंबे समय से कई दुकानें या व्यावसायिक परिसर संचालित हो रहे हैं। हालांकि, जमीन की वास्तविक स्थिति और दुकानों के वैध या अवैध होने की पुष्टि संबंधित राजस्व एवं नगर पालिका रिकॉर्ड की जांच के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत में 23 दुकानों का उल्लेख

अजय यादव के अनुसार 23 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय में दिए गए आवेदन के साथ दुकानों और परिसरों की एक सूची भी संलग्न की गई है। सूची में कुल 23 दुकानों/परिसरों का विवरण होने का दावा किया गया है।

शिकायत के साथ दी गई सूची में कथित दुकानदारों के नाम, दुकान का आकार, स्वयं उपयोग या किराये पर होने की स्थिति और कुछ परिसरों के सामने कथित मासिक किराये की राशि का उल्लेख किया गया है।

सूची में कई नाम और विभागीय उल्लेख

शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत सूची में जयराम दास नोतानी के नाम के साथ नगर पालिका राजस्व निरीक्षक का उल्लेख किया गया है। इसी तरह रामेश्वर चौरसिया के नाम के साथ नगर पालिका राजस्व निरीक्षक और गणेश प्रसाद मुखरैया के नाम के साथ नगर पालिका अतिक्रमण शाखा का उल्लेख किया गया है।

सूची में जगदीश चावला, ब्रजेश राय, यशपाल चावला, अमृत लाल मिश्रा सहित अन्य नाम भी दर्ज होने की बात कही गई है। कुछ परिसरों को किराये पर दिए जाने का उल्लेख भी सूची में किया गया है।

शिकायत में सूची के नीचे कुल मासिक राशि ₹1,75,500 का उल्लेख किया गया है। हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा दी गई सूची में दर्ज अलग-अलग रकम का वास्तविक योग, दुकानों का स्वामित्व और कब्जे की स्थिति संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से सत्यापित किया जाना बाकी है।

2025 में नोटिस जारी होने का दावा

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में दावा किया है कि नगर पालिका परिषद द्वारा 25 फरवरी 2025 को धारा 187 के तहत नोटिस जारी किया गया था। शिकायत के अनुसार नोटिस में 15 दिन के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे और धारा 187(8) के तहत आगे की कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

अजय यादव का आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई और संबंधित परिसर लंबे समय तक संचालित होते रहे। इस दावे की प्रशासनिक रिकॉर्ड से स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

जनसुनवाई के बाद भी सीमांकन नहीं होने का आरोप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जनसुनवाई के निर्देश के बावजूद 15 सितंबर 2026 तक स्थल निरीक्षण और सीमांकन नहीं कराया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों पर मामले को लंबित रखने का आरोप लगाया है।

आवेदन में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 का उल्लेख करते हुए मांग की गई है कि यदि जांच में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

संयुक्त टीम बनाकर सीमांकन की मांग

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले की जांच के लिए SDM, तहसीलदार, नगर पालिका CMO और राजस्व निरीक्षक को शामिल करते हुए संयुक्त टीम बनाई जाए।

उन्होंने मौके का सीमांकन कराने, वीडियोग्राफी के साथ पंचनामा तैयार करने और सरकारी रिकॉर्ड से जमीन की स्थिति का मिलान करने की मांग की है। यदि जांच में अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग भी आवेदन में की गई है।

अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग

शिकायतकर्ता ने कथित अतिक्रमण के अलावा यह भी मांग की है कि यदि किसी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका जांच में सामने आती है तो उसके विरुद्ध विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने आवेदन में यह भी कहा है कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं होती है तो वे आयुक्त सागर संभाग, लोकायुक्त मध्यप्रदेश और उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।

प्रशासन की जांच के बाद स्पष्ट होगी जमीन की स्थिति

इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बिंदु शासकीय रिकॉर्ड के आधार पर जमीन की स्थिति का सत्यापन है। खसरा रिकॉर्ड, सीमांकन, नगर पालिका के रिकॉर्ड, पुराने नोटिस और दुकानों के कब्जे से संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित जमीन पर किस प्रकार का निर्माण या कब्जा है और उसकी वैधानिक स्थिति क्या है।

इसी तरह शिकायत में बताए गए 23 परिसरों, उनके कथित किराये और स्वामित्व संबंधी जानकारी की पुष्टि भी संबंधित विभागीय रिकॉर्ड से होना जरूरी है।

News Yug 24 की स्थिति

News Yug 24 ने इस मामले में शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए आवेदन और 23 सितंबर 2026 को हुई बातचीत के आधार पर जानकारी प्रकाशित की है। प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद जमीन, दुकानों और संबंधित पक्षों की वास्तविक स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

महत्वपूर्ण नोट: इस खबर में लगाए गए अतिक्रमण, किराये, अधिकारियों की भूमिका और कार्रवाई में देरी से संबंधित आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन और उनके बयान पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शासकीय भूमि की वास्तविक स्थिति, दुकानों का स्वामित्व/कब्जा और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सरकारी रिकॉर्ड एवं प्रशासनिक जांच से निर्धारित होगी। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

स्रोत: शिकायतकर्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए आवेदन, दस्तावेज और 23 सितंबर 2026 को हुई बातचीत के आधार पर।

यह भी पढ़ें

🔴 Follow-up Update:

इस मामले में अब CM हेल्पलाइन के निराकरण को लेकर नया विवाद सामने आया है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि अतिक्रमण हटाने के बावजूद मौके पर दुकानें अब भी मौजूद हैं।

👉 पढ़ें पूरी Follow-up खबर: CM हेल्पलाइन में अतिक्रमण हटाने का दावा, शिकायतकर्ता बोला- मौके पर दुकानें अब भी मौजूद

दमोह जिले का पहला राह-वीर प्रकरण स्वीकृत, दो भाइयों को ₹25 हजार सम्मान राशि

Post a Comment

0 Comments